|
हरित आवरण भू-दृश्य
पर्यावरण के प्रति चिन्तनशील एसजेवीएन ने रामपुर परियोजना के कचरा डंप यार्ड जैसे परियोजना निर्माण स्थल पर भू-आकृति पुनः हासिल करने के लिए भू-हरित अपरदन नियंत्रण आवरण शुरू किया है, ताकि खुदाई से निकली मिट्टी को एकसाथ गहराई से जकड़ ले।
खोपरे के रेशे से बना यह आवरण पानी को लंबे समय तक धारित करने के साथ-साथ कुछ अवधि में प्राकृतिक खाद बनकर मिट्टी के साथ पूरी तरह धुल मिल जाता है।
परियोजनाओं की गहरी सुंगों से निकली चट्टानी मिट्टी तथा अन्य कीचड़ पादप विकास के लिए सामान्यतः जब तक प्रतिकूल होता है जब तक कि एक लंबी अवधि में यह कचरा डंप यार्डों में पादप विकास के लायक नहीं होता।
इतनी प्रतिकूल मृदा परिस्थितियों में प्राकृतिक पुनर्जीवन को सफल करने के लिए कम से कम दो विकास ऋतुओं की जरूरत होती है।
पुनर्पोध संबंधी कठिनाईयों को दूर करने, ढलानों को पक्का करने तथा अपरदन को रोकने के लिए डंप यार्ड की ऊँची नीची ढलानों को सर्वप्रथम इन पर उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी परत बिछाने से पहले इन्हें एकस्तरीय किया जाता है।
उपजाऊ उपरी पर्त के लिए पूर्व मिश्रित मिट्टी का आयात करके यह मौजूदा मिट्टी के साथ 60:40 के अनुपात में मिलाई जाती है तथा उपजाऊ पादप पोषक मिट्टी की पर्त हासिल करने के लिए इसमें खाद मिलाई जाती है।
एक भू-हरित अपरदन नियंतरण आवरण रखने से पहले, स्थानीय रूप से प्रचलित पौंधों के बीजों को ऊपरी परत में मिश्रित करतें हैं।
बीज रोपने के अतिरिक्त महेन्दू, डोडोनिया विसकोसा, सिल्वर ओक, ग्रेविलिया रोबूस्टा, बोगेनविला तथा सूबाबूल-ल्यूसीना, न्यूकिसिफाला जैसी प्रजातियों के पौधे उपचारित ढलानों पर लगाए जाते हैं।
नियमित रूप से छह माह तक पानी लगाने के बाद मौजूदा कचरा डम्प यार्ड के निशान मिटते जाते हैं तथा ढलानें हरी हो जाती है और भू-आकृति का स्वरूप ले लेती हैं।
तीखी ढलान तथा विभिन्न मौसमीय हालातों का सामना कर सकने के लिए भू-हरित अपरदन नियंत्रण आवरण जैविक रूप से नष्ट हो सकने वाले खोपरे के रेशे को उच्च घनत्व वाले पोली इयूथरीन (एचडीएफई) से रिइन्फोर्स करके बनाया जाता है।
हरित आवरण का डिजाइन एवं विकास अपरदन नियंत्रण समस्याओं तथा ढलान दृढ़ीकरण के समाधान के तौर पर किया गया है।
|